शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर शिक्षकों और संस्थाप्रधानों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। सत्र 2025-26 के लिए न्यून परीक्षा परिणाम मापदंड (Minimum Exam Result Criteria) जारी कर दिए गए हैं।
यदि किसी विद्यालय या विषय का परिणाम इन निर्धारित मापदंडों से कम रहता है, तो संबंधित शिक्षक या संस्थाप्रधान को इसके लिए जवाबदेह माना जाता है। यहाँ सभी पदों के लिए निर्धारित मापदंडों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
📊 संस्थाप्रधान और शिक्षकों हेतु न्यून परिणाम मापदंड
नीचे दी गई तालिका में 12वीं, 10वीं और 8वीं/5वीं बोर्ड परीक्षाओं के लिए न्यूनतम पासिंग प्रतिशत और ‘E’ ग्रेड के नियम स्पष्ट किए गए हैं:
1. संस्थाप्रधान (Principal) हेतु
- 12वीं बोर्ड: 60% या इससे न्यून
- 10वीं बोर्ड: 50% या इससे न्यून
- 8वीं/5वीं बोर्ड: 50% या इससे अधिक विद्यार्थियों के ‘E’ ग्रेड आने पर।
2. कार्यवाहक संस्थाप्रधान (Acting Principal) हेतु
- 12वीं बोर्ड: 30% या इससे न्यून
- 10वीं बोर्ड: 25% या इससे न्यून
- 8वीं/5वीं बोर्ड: 60% या इससे अधिक विद्यार्थियों के ‘E’ ग्रेड आने पर।
3. शिक्षक (Teacher) हेतु
- 12वीं बोर्ड: 70% या इससे न्यून
- 10वीं बोर्ड: 60% या इससे न्यून
- 8वीं/5वीं बोर्ड: 40% या इससे अधिक विद्यार्थियों के ‘E’ ग्रेड आने पर।
4. कार्यवाहक शिक्षक (Acting Teacher) हेतु
- 12वीं बोर्ड: 35% या इससे न्यून
- 10वीं बोर्ड: 30% या इससे न्यून
- 8वीं/5वीं बोर्ड: 60% या इससे अधिक विद्यार्थियों के ‘E’ ग्रेड आने पर।
📌 महत्वपूर्ण नियम व शर्तें (जरूर पढ़ें)
न्यून परीक्षा परिणाम की गणना करते समय शिक्षा विभाग द्वारा कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है:
- न्यूनतम ठहराव: संस्था प्रधान या शिक्षक के परिणाम की गणना तभी की जाएगी, जब उनका संबंधित विद्यालय में सत्र के दौरान (जुलाई से फरवरी तक) न्यूनतम 5 माह का ठहराव (Stay) रहा हो।
- विषय अध्यापन में छूट के नियम: * यदि कोई कार्यवाहक शिक्षक अपने मूल विषय के अतिरिक्त, अपनी अर्जित योग्यता (Acquired Qualification) से संबंधित किसी अन्य विषय को उच्च कक्षाओं में पढ़ाता है, तो उसे न्यूनतम मापदंड में कोई छूट नहीं मिलेगी।
- परंतु, यदि वह अर्जित योग्यता के अलावा किसी बिल्कुल भिन्न विषय का अध्यापन करवाता है, तो उसे निर्धारित मापदंड में 50% की छूट दी जाएगी।
- रिजल्ट की गणना का तरीका:
- पूरक परीक्षा (Supplementary): पूरक परीक्षा के परिणाम को मुख्य गणना में सम्मिलित नहीं किया जाता है।
- ग्रेस (By Grace): सानुग्रह अंकों से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को पास माना जाता है और उन्हें परिणाम की गणना में सम्मिलित किया जाता है।
- प्रैक्टिकल और मुख्य परीक्षा के नियम: यदि कोई विद्यार्थी 12वीं (उच्च माध्यमिक) की प्रायोगिक (Practical) परीक्षा में उपस्थित होता है, परंतु मुख्य लिखित परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो उस विद्यार्थी को संबंधित विषय/संस्थाप्रधान के परिणाम में ‘फेल (Fail)’ ही गिना जाएगा।